Infosys: शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए शुक्रवार का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। खासकर आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के निवेशकों को बड़ा झटका लगा, जब देश की दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। Infosys, TCS, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से नीचे आए, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में चिंता का माहौल बन गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी Accenture द्वारा अपने पूरे वित्तीय वर्ष के राजस्व वृद्धि अनुमान को कम करना है। Accenture के इस फैसले ने न केवल अमेरिकी बाजार बल्कि भारतीय आईटी कंपनियों के निवेशकों की चिंताओं को भी बढ़ा दिया। परिणामस्वरूप आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली और बाजार में आईटी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुआ।
IT Stocks में कितनी आई गिरावट?

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर Infosys के शेयरों पर देखने को मिला, जहां कंपनी के शेयर लगभग 8.59 प्रतिशत तक टूट गए। इसके अलावा Tech Mahindra, TCS, HCL Tech और Wipro के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट
| कंपनी का नाम | गिरावट |
|---|---|
| Infosys | 8.59% |
| Tech Mahindra | 7.00% |
| TCS (Tata Consultancy Services) | 6.52% |
| HCL Tech | 6.00% |
| Wipro | 4.29% |
इस बड़ी बिकवाली का असर पूरे आईटी सेक्टर पर पड़ा और BSE IT Index करीब 5.18 प्रतिशत तक नीचे आ गया।
क्यों टूटा IT सेक्टर?
भारतीय आईटी कंपनियां अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से प्राप्त करती हैं। जब दुनिया की प्रमुख आईटी सर्विस कंपनी Accenture अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को कम करती है, तो इसका सीधा संकेत यह माना जाता है कि वैश्विक ग्राहक टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने में सतर्क हो गए हैं।
Accenture ने अपने Constant Currency Revenue Growth Guidance को पहले के 3-5 प्रतिशत से घटाकर 3-4 प्रतिशत कर दिया है। वहीं Core Commercial Guidance को भी 4-6 प्रतिशत से घटाकर 4-5 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस बदलाव ने निवेशकों को संकेत दिया कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी सेक्टर की मांग अपेक्षा से कमजोर रह सकती है। यही वजह है कि भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में अचानक बिकवाली बढ़ गई।
निवेशकों में क्यों बढ़ी चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा हिस्सा विदेशी क्लाइंट्स से मिलने वाले प्रोजेक्ट्स पर निर्भर करता है। जब वैश्विक कंपनियां अपने खर्च कम करती हैं, तो उसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के ऑर्डर बुक और राजस्व पर पड़ सकता है।
बाजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शश्वत सिंह के अनुसार, Accenture द्वारा जारी नया अनुमान पूरे आईटी सेक्टर के लिए एक चेतावनी की तरह है। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां अभी भी अपने टेक्नोलॉजी बजट को लेकर सतर्क बनी हुई हैं। यही कारण है कि निवेशकों ने संभावित जोखिम को देखते हुए आईटी शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या पड़ा असर?
आईटी सेक्टर में आई इस भारी गिरावट का असर पूरे भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। पिछले पांच कारोबारी सत्रों से लगातार तेजी देखने के बाद बाजार अचानक दबाव में आ गया।
प्रमुख इंडेक्स का प्रदर्शन
| इंडेक्स | गिरावट |
| BSE Sensex | 815.02 अंक |
| NSE Nifty | 212.85 अंक |
| BSE IT Index | 5.18% |
Sensex गिरकर 76,594.96 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 23,959.95 तक फिसल गया। इससे साफ है कि आईटी शेयरों की कमजोरी ने पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
ADR में भी दिखा असर
भारतीय आईटी कंपनियों के American Depositary Receipts यानी ADR में भी कमजोरी देखने को मिली। Geojit Investments Limited के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार Accenture की गाइडेंस कटौती के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के ADR में भी बिकवाली बढ़ी है।
ADR विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के शेयरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें गिरावट आने का मतलब है कि वैश्विक निवेशक भी फिलहाल आईटी सेक्टर को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
क्या IT सेक्टर के लिए खतरे की घंटी है?
हालांकि एक दिन की गिरावट को लंबे समय की कमजोरी नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई हैं। कंपनियां टेक्नोलॉजी निवेश को लेकर सोच-समझकर फैसले ले रही हैं।
इसके बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में लगातार अवसर मौजूद हैं। इसलिए कई विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक संभावित अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले तिमाही नतीजों और कंपनियों की नई गाइडेंस पर निवेशकों की नजर रहेगी। यदि वैश्विक मांग में सुधार आता है और क्लाइंट्स टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ाते हैं, तो आईटी सेक्टर में फिर से मजबूती देखने को मिल सकती है।

फिलहाल निवेशकों को बाजार की चाल और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर बनाए रखनी चाहिए। जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश रणनीति बनाना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
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